पुलिस अफसर से प्रधानमंत्री तक का सफर: एक प्रेरणादायक कहानी
थाईलैंड ,3 अप्रैल। साल 2004 की बात है। थाईलैंड के दक्षिणी हिस्से में अलग मुस्लिम देश ‘पट्टानी’ के लिए भारी प्रदर्शन हो रहे थे। मुस्लिम बहुल नरथिवात राज्य में पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे 6 लोगों को गिरफ्तार किया। 25 अक्टूबर को इनकी रिहाई के लिए 2000 से ज्यादा मुस्लिम एक पुलिस स्टेशन में इकट्ठा हो गए।
अलगाववादियों और पुलिस में टकराव तेज हुआ। तब PM रहे थाकसिन शिनवात्रा ने इसे सख्ती से कुचलने का आदेश दिया। पुलिस ने हजारों लोगों को जबरन पकड़कर, उन्हें निर्वस्त्र किया और उनके हाथ पीठ के पीछे बांध दिए। उन्हें 26 ट्रकों में ठूंसकर 150 किमी दूर एक आर्मी कैंप भेज दिया गया।
7 घंटे बाद जब उन्हें कैंप में उतारा गया तो इनमें से 78 की दम घुटने से मौत हो चुकी थी। इस घटना से थाईलैंड सरकार की काफी आलोचना हुई। अलगाववादियों का समर्थन कर रहे मलेशिया ने भी इस पर नाराजगी जताई। हालांकि, इस घटना ने थाईलैंड की बौद्ध बहुल जनता के बीच थाकसिन को लोकप्रिय बना दिया। लोगों को लगा कि थाकसिन ही वो शख्स हैं, जो देश को एकजुट रखने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।
गृहयुद्ध से चीन की हालत खराब हुई तो परदादा थाईलैंड आए
साल 1850 की बात है। चीन में होंग शिउचुआन नाम के एक शख्स ने बौद्ध धर्म के खिलाफ अभियान छेड़ रखा था। होंग खुद को ईसा मसीह का छोटा भाई बताता था। उसने किंग राजवंश के खिलाफ बगावत कर चीन के दक्षिणी इलाके को हड़पने की कोशिश की।
इससे देश में भीषण गृहयुद्ध शुरू हो गया और इसमें 2 करोड़ लोग मारे गए। देश की हालत खराब हो चुकी थी। ऐसे में सेंग साएखु नाम के एक शख्स ने देश छोड़ दिया और सियाम चले आए। तब थाईलैंड को सियाम कहा जाता था। सेंग ने रेशम के कपड़े का बिजनेस शुरू किया और खूब तरक्की की।
1938 में साएखु परिवार ने थाई संस्कृति में घुलने-मिलने के लिए ‘शिनवात्रा’ टाइटल अपना लिया। थाकसिन, साएखु परिवार के पांचवीं पीढ़ी के वंशज हैं। थाकसिन का जन्म 1949 में हुआ। थाकसिन के दादा चियांग साएखु परिवार के रेशम बिजनेस को और आगे ले गए और ‘शिनवात्रा सिल्क्स’ की स्थापना की।
थाकसिन के पिता लोएट शिनवात्रा ने भी अपने फैमिली बिजनेस को और आगे बढ़ाया। साथ ही राजनीति से भी जुड़े। लोएट 1968 से 1976 तक सांसद भी रहे। इससे थाकसिन को कम उम्र में ही राजनीतिक पहचान मिल गई।